Tuesday, 7 March 2017

ब्लड कैंसर से बचने के कुछ घरेलु नुस्खे

ब्लड कैंसर से बचने के कुछ घरेलु नुस्खे

ब्लड कैंसर के कुछ घरेलू नुस्खे

एलोवेरा

एलोवेरा रक्त केंसर के इलाज में बहुत ही फायदेमंद घरेलू नुस्खा है। एलोविरा पौधे के छोटे-छोटे टुकडे काटकर उसे आधा लीटर शहद और 3-4 चम्मच फ्रूट जूस के साथ मिलाकर अच्छे से घोल बना लें। इस घोल का हर रोज खाने से 15 मिनट पहले तीन या चार बार सेवन करें। इस घोल का 10‍ दिन सेवन करके ब्लड सेल्स की जांच कराएं।
एलोवेरा – एक संजीवनी

गेहूं की घास का जूस

हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट एक गिलास गेहूं की घास का जूस बनाकर पीजिए। इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और खून का संचार बढता है।
आयुर्वेदिक

लाल मिर्च

ब्लड कैंसर के मरीज को लाल मिर्च का सेवन करना चाहिए। लाल मिर्च में मौजूद विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीकडेंट तत्व रक्त संचार को बढाता है। लाल मिर्च में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट कैंसररोधी कोशिकाओं को बढने से रोकता है। इसके अलावा लाल मिर्च दिल की बीमारियों को भी दूर करता है। लाल मिर्च को खाने के साथ और इसकी चटनी बनाकर प्रयोग की जा सकती है।

 red peper

फल और जूस

रक्त कैंसर के मरीज हर रोज ज्यादा मात्रा में ताजे फलों का सेवन करें। ताजे फल जैसे अगूर, संतरा, अनार आदि खाएं जिससे कि शरीर में हीमोग्लोमबिन का स्तर बढे। इसके अलावा ब्रोकोली, पालक, गोभी और हरे रंग की सब्जियां खनिज, विटामिन और एंजाइम के उच्च स्रोत हैं।
fruit and shoup

ग्रीन टी

रक्त कैंसर से बचाव के लिए ग्रीन टी बहुत ही फायदेमंद होता है। ग्रीन टी में ज्यादा मात्रा में एंटी-ऑक्सीसडेंट पाया जाता है। ग्रीन टी पीने से स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होता है जो कि कैंसररोधी कोशिकाओं को बढने से रोकता है। हर रोज 4-5 बार ग्रीन टी का सेवन कैंसर के मरीज को करना चाहिए।

आयुर्वेद द्वारा कर्क (Cancer) रोग से बचाव व उपचार

आयुर्वेद द्वारा कर्क (Cancer) रोग से बचाव व उपचार


कर्क रोग (Cancer In Hindi)

कॅन्सर अथवा कर्करोग एक जानलेवा और कष्टकारी रोग है. इसके लक्षणों का पता देर से चलता है तथा निदान में भी देर लग जाती है. इस रोग में शरीर के किसी अंग की कोशिकायों (cells) में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है. इसे अन्य अंगों पर प्रादुर्भाव (negative effect) पड़ता है. जब कॅन्सर के ट्यूमर में  बढ़ोतरी हो जाती है तो वह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है और यह अत्यंत पीढ़ा दायक रूप ले लेता है. इस रोग में तीनों दोष प्रभावित होते हैं.

आयुर्वेद में कॅन्सर का निदान (Remedial Measures In Treatment Of Cancer In Hindi)

इस रोग में तीनों दोषों में विकृति पाई जाती है तथा इनका निवारण चरक और सुश्रुत संहिता में वर्णित किया गया है. इन तीनों दोषों की शांति हो जाने पर यह रोग स्वयं ही ठीक हो जाता है.
cancer treatment in ayurveda hindi

कर्क रोग में लाभ देनेवाली कुछ औषधियाँ (Herbs Useful In Treatment Of Disease in Hindi)

आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार सात मुख्य औषधियों का प्रयोग इस रोग के विमोचन में किया जाता है. यह औषधियाँ इस प्रकार हैं.
अश्वगंधा : यह औषधि का उपयोग शरीर को पुष्टि देने के लिए एवं शरीर में कॅन्सर की कोशिकायों को ख़त्म कर शरीर में स्वास्थ का संचार करता है.
लहसुन: लहसुन के प्रयोग से दिमाग़ से कॅन्सर की कोशिकायों को ख़त्म किया जा सकता है. यदि इसमें ब्रॉकोल्ली और प्याज़ का प्रयोग किया जाए तो इस रोग की निवरत्ति  करने में बहुत सहायता प्राप्त होती है.
ग्रीन टी : यह एक ऐसी औषधि है जिससे बड़ी आँत में मौजूद कॅन्सर तथा अन्य प्रकार के कॅन्सर का निवारण भी किया जाता है. साथ ही यह मस्तिष्क में antioxidants की मात्रा को बढ़ती है, जिससे रोग प्रतिकारक शक्ति का विकास भी होता है.
सीलॅनडाइन (Celandine) : यह उन वर्ग के पौधों मैं से है जिससे कॅन्सर और अन्य रोगों का निवारण बड़ी ही आसानी से होता है. इससे दमा तथा atherosclerosis नामक रोगों का निवारण भी होता है.
घृत कुमारी तथा आपल सीडर विनिगर : जब दो प्रकार की औषधियों से बड़ी आँत में प्रयोग किया जाता है, उससे शरीर में मौजूद विषैले तत्वों से निजात मिलती है. यह आपल सीडर विनिगर की से विभिन्न प्रकार के कॅन्सर का निवारण हो जाता है.
अदरक :  का प्रयोग भारतीय भोजन की पद्धति में बहुपयोगी है. अदरक का प्रयोग आँतों की सोज़िश को दूर करने में सहायता देता है.
अदरक के प्रयोग से ओवायरियन और प्रॉस्ट्रट कॅन्सर का उपचार भी किया जा चुका है.
हल्दी : इस भारतीय मसाले में लगभग हर प्रकार के रोग को ठीक करने की गुणवत्ता पाई जाती है. इस पौधे की जड़ मैं मौजूद कुर्कुमिन्स (curcumins) से कोलन (colon) के कॅन्सर की कोशिकायों को नष्ट किया जाता है.

कर्क रोग से बचाव करने वाले तथा उपचार में लाभ देनेवाले कुछ नुस्खे (Some Home Remedies And Tips Useful In Prevention And Mitigation Of Cancer)

  • 200 मिलीलीटेर दूधि का रस लें और उसमें  तुलसी के 5-6 पत्तों का रस मिलकर रोज़ सेवन करें. इस प्रयोग से खून की acidity (आम) ख़त्म हो जाती है और इससे कॅन्सर की कोशिकाएँ समाप्त हो जाती हैं.
  • प्रातः काल उठकर पानी के साथ 4-5 तुलसी पत्र का सेवन करें.
  • 1 गिलास गेहूँ के जवारे का रस रोज़ सेवन करने से शरीर से कॅन्सर की कोशिकायों को समाप्त किया जा सकता है.
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  • हल्दी, लहसुन, सोंठ का प्रयोग खाने में अधिक करना चाहिए. हल्दी को गाय के दूध से बने देसी घी में तड़का लगाने से से शरीर में वह जस्प हो जाती है और इससे हल्दी का विशेष औषधीय लाभ देखने को मिलता है.
  • चीनी और दूध से बनी चीज़ों का सेवन ना करें. शरीर में आल्कलाइन (alkaline) वातावरण का निर्माण करने वाले भोजन जैसे की ताज़ा सब्जियों का रस, इनका सेवन अधिक करें.
  • शुद्ध शाकाहारी भोजन लें.
  • प्लास्टिक से बनें डिस्पोज़ेबल कप्स में गर्म पेय (चाय, कॉफी) और गर्म भोजन ग्रहण नही करना चाहिए. नवीन शोथ से यह पता चला है की प्लास्टिक उच्च तापमान पर किन्ही ऐसे विषैले पदार्थ छोड़ता है जिससे विभिन्न प्रकार के कॅन्सर उत्पन्न होते हैं.